चूड़ियों का भारतीय नारी के जीवन में क्या महत्त्व है ? | अर्था | आध्यात्मिक विचार

ArthaPublished: June 14, 2017
Published: June 14, 2017

चूड़ियों का भारतीय नारी के जीवन में क्या महत्त्व है ? | ARTHA

१ भारत में प्राचीन काल से हि नारियों में चूड़ियाँ पहनने की प्रथा है
२ इसे बांगड़ी या बांगली भी कहा जाता है , जिसका संस्कृत अर्थ है, ऐसी आभूषण जिसका उपयोग कलाईयों को अधिक आकर्षित करने के लिए किया जाये
३. भारतीय संस्कृति में चूड़ियाँ पहनना, शादीशुदा स्त्रियों के लिए शुभ माना जाता है
४. कुछ समुदायों में यह धारणाए है कि, बिना चूड़ियों के हाथ को अपशगुण माना जाता है, इसलिए जब चूड़ियाँ बदलनी होती है, तो स्त्रियां कम से काम एक चूड़ी हाथ में जरूर रखकर नए चूड़ियों को पहनती है
५. धार्मिक आस्थाओ के अनुसार, जिनकी पत्नी चूड़ियाँ पहनती है , उस पति को लंबे और स्वस्थ ज़ीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है
६. घर में चूड़ियों की खनक से नकारात्मक शक्तियों का असर कम होता है, और गृह क्लेश से निजात मिलती है
७. घर में चूड़ियों की खनक से ईश्वर की कृपा भी बनी रहती है
८. चूड़ियों को स्वास्थ, सुख एवं समृद्धि का प्रतीक माना जाता है
९. चूड़ियों का पहनना, हाथो की नसों को प्रभावित करती है एवं नाड़ियो को धड़कने में सहायता कर रक्त संचालन में बृद्धि करती है

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